Page 9 - NIS Hindi 16-31 December, 2025
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राष्ट्र सांविवींधाान विदवींसा






        भाारतीया सांवि�धााना : राष्ट् के े  �तषमूाना




                                                                               ष
                    और भावि�ष्य केा मूार्गदशंषके



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               भूाराती केा संंमिवधान, �शी केे वतीषमान औरा                जाा�ी कोे विलए जाीने-मेंरने वंाले लोगौं ने कोई संपने
              भूमिवष्य केा मागाष�शीषके है। बीतीे 76 वर्षं मं             �खे थाे। उन संपनं और हॉजाारं संाल कोी भाारत
                                                                          े
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             �शी केे संामने जो भूी चानौमितीयां आई, हमाराे   आ कोी मेंहॉान परंपरा कोो संंजाोते हॉुए हॉमेंारे संंविवंधाान
          संंमिवधान ने हरा उसं चानौतीी केा संमाधान केराने   विनमेंायताओं ने हॉमेंं संंविवंधाान वि�र्या। भाारत कोो ‘लोकोतंत्र कोी जाननी’
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             केे मिलए उमिचाती मागाष मि��ाया। भूाराती आज,    कोहॉा जााता हॉ। ‘लोकोतत्र कोी जाननी’ को रूप में भाारत कोो और मेंजाबती
                                                                                       ू
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              परिरावतीषन केे बहती बड़े �ौरा संे गाुजरा राहा है।   प्र�ान कोरने मेंं हॉमेंारे संंविवंधाान कोी भाविमेंकोा बहॉुत बड़ीी हॉै। आजा हॉमें
                                                                                                            य
                                                                                          ु
              आत्ममिनभूषरा औरा मिवकेमिसंती भूाराती बनने केे   भाारत कोे विजासं संंविवंधाान पर गौौरवं कोा अनभावं कोरते हॉं, उसंकोे विनमेंाण
                                                                         ं
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                                                                                   ु
                                                            मेंं बाबा संाहॉेब अबर्डकोर कोे कोशेल नतृत्वं कोी अविमेंटी छाप वि�खती
           मागाष परा अंग्रीसंरा है। ऐसंे अंहम संमय मं भूाराती   हॉै। उन्हॉंने संविनब्धिश्चत विकोर्या विको संमेंाजा कोे हॉर तबकोे कोा को�र्याण
                                                                      ु
            केा संंमिवधान ही हमं राास्तीा मि��ा राहा है। 26   हॉो। संभाी कोे विलए संमेंानता और संभाी कोे प्रवित संंवं�नशेीलता, हॉमेंारे
                                                                                                े
              नवंबरा केो संंमिवधान मि�वसं केे अंवसंरा परा   संंविवंधाान कोी पहॉचान हॉै। र्यहॉ हॉर नागौरिरको, गौरीब, �विलत, विपछड़ीा,
          संंमिवधान सं�न केे केंद्रीीय केक्षा मं भूव्य रााष्ट्रीीय   वंविचत, आवि�वंासंी, मेंविहॉला संभाी कोे मेंूलभाूत अविधाकोारं कोी रक्षेा कोरता
                                                              ं
           संमाराोह केे संाथा रााष्ट्रीव्यापी संंमिवधान मि�वसं   हॉै और उनकोे विहॉतं कोो संुरविक्षेत रखता हॉै। संंविवंधाान कोी इंसंी मेंहॉत्ताा
                                                                        ु
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                   संमाराोहं केा मिकेया गाया आयोजन...       कोो �ेखते हॉुए गौजारात कोे मेंुख्र्यमेंत्री कोे रूप मेंं नरंद्र मेंो�ी ने 2010
                                                            मेंं 'संंविवंधाान गौौरवं र्यात्रा' कोी थाी। इंसंकोे बा� प्रधाानमेंत्री बनने पर
                                                                                                    ं
                                                            वंषय 2015 मेंं 26 नवंंबर कोो संंविवंधाान वि�वंसं कोे रूप मेंं मेंनाने कोी
                                                            घाोषणा कोी। उन्हॉंने ‘संंविवंधाान वि�वंसं’ कोी शेुरुआत कोर लोकोतांवित्रको
                                                             में�र्यं कोे प्रवित �शेवंाविसंर्यं कोो अविधाको संजागौ बनाने कोा कोार्यय विकोर्या।
                                                                        े
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