Page 37 - NIS HINDI 1-15 May, 2026
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लि�शेेष  रेंाष्ट्र कॉे नाम सबीोधान
                                                                                                            ं

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                                                                        ं
                                     प्रधाानमत्राी नरंद्र मो�ी का राष्ट्री के नाम सबोधान

                     े
         “मं दीशु काी �रा �ाराी काो ति�श्वाास हिदीलातंा �,
                                                                                                           ं
                                                                                                          ू
                                                                                                     ं
             हामू मूदिहालेा आ�क्षण के �ास्तेे मूं आनेे वाालेी हा� रुकेावाट केो खत्मा के�के �हागे”
                                                                                                       े
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             �ाराी शनिक्त वादा� अधिधैनि�योर्मा संशोधै� किकेसी से केछ छी��े केा �हैं, बल्कि� दाेश केी �ाराी केो उसकेा अधिधैकेारा दाे�
                                                                                                        े
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            केा एके र्माहैायोज्ञा था। योहै � केवाल सर्मायो केी र्मांग हैै, बल्कि� विवाकेधिसत भूारात केी योात्रा र्मां �ाराी केा �ेतृत्व रााष्ट्र केो �ई
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                                                                                                       े
                                                                       व
           ऊंचुाई दाे� केा एके सशक्त आधैारा हैै। योहै रााज�ीवित �हैं, रााष्ट्रदिहैत केा नि�णयो था, जिजस परा लोकेसभूा र्मां आंकेड़ोंं � ब्रेेके
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            लगायोा। रााष्ट्र�ीवित परा रााज�ीवित के हैावाी हैो�े से दाुखी प्रैधैा�र्मांत्री �राद्र र्माोदाी �े 18 अप्रैैल 2026 केो रााष्ट्र केो संबोधिधैत
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                                                                  ं
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              केरात हैुए अप� भूावाुके र्मा� केी व्यथा रााष्ट्र औरा �ाराी शनिक्त के सर्माक्षा राखी। साथ हैी, भूराोसा दिदालायोा किके र्मादिहैला
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                                                                                         े
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               आराक्षाण के राास्तेे र्मां आ� वााली हैरा रुकेावाटुं केो खत्मा केरागे… पह्निढ़ए रााष्ट्र के �ार्मा संबोधै� के संपादिदात अंश:
        �ले दिहत से बड़ीे �ेश दिहत: हामारे निलए देेश निहा� सूवोपरिर हाै, लनिकन
                                                     े
        जाबी कुछ लोगोंं के निलए देल निहा� सूबी कुछ हाो जाा�ा हाै, देल निहा�, देेश निहा�
        सूे बीड़ेा हाो जाा�ा हाै, �ो नारी शल्किक्� को, देेश निहा� को, इसूका खाानिमर्यााजाा
        उठना पड़े�ा हाै। इसू बीार भाी र्याहाी हाुआ हाै। कांग्रासू, �ीएमके, टूीएमसूी
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        और सूमाजावादेी पाटूी जासूे देलं की स्वाथाी राजानीनि� का नुकसूान देेश
        के नारी शल्किक्� को उठाना पड़ेा हाै।
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        नारी नहं भलेती अंपमान: जाबी र्याे नारी निहा� का प्रस्�ाव निगोंरा, �ो कांग्राेसू,
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        �ीएमके, टूीएमसूी, सूपा जासूी परिरवारवादेी पानिटूटर्याा, खाशी सूे �ानिलर्याा बीजाा
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        रहाी थां। मनिहालाओं सूे उनके अनिधाकार छीनकर र्याे लोगों मजां थापथापा रहाे थाे।
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        उन्हांने जाो निकर्याा वो केवल टूबील पर थााप नहां थाी, वो नारी के स्वानिभामान
        पर उसूके आत्मसूम्मान पर चोटू थाी और नारी सूबी भाूल जाा�ी हाै, अपना
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        अपमान कभाी नहां भाल�ी, इसूनिलए सूसूदे म काग्रासू और उसूक सूहार्याोनिगोंर्यां
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        के व्र्यावहाार की कसूक हार नारी के मन मं हामशा रहागोंी।   सूशोधान 21वं सूदेी के भाार� की नारी को नए अवसूर देने, नई उड़ेान
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        दिवारोधा सदिवाधाान दिनमा�ताओं का अंपमान: सूसूदे मं नारी शल्किक्�   देने, उसूके सूामने सूे बीाधााएं हाटूाने का महाार्याज्ञा थाा।
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                                                      ू
        वदेन सूशोधान का निजान देलं ने निवरोधा निकर्याा हाै, उनसूे मं देो टूूक कहांगोंा,   नारी शस्त्�त वा�न सशोधान समय की मांगु: नारी शल्किक्� वदेन
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                                                                         ं
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        र्याे लोगों नारी शल्किक्� को फुॉर ग्राांटू� ले रहाे हां, वो र्याे भाूल रहाे हां निक 21वं   सूशोधान उ�र, देनिक्षाण, पव�, पल्किश्चम, सूभाी राज्र्यां की शल्किक्� मं सूमान
                                                                               ू
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        सूदेी की नारी देेश की हार घटूना पर नजार रखा रहाी हाै, वो उनकी मशा     वनि� का प्रर्याासू थाा। र्याे सूसूदे मं सूभाी राज्र्यां की आवाजा को अनिधाक
                                                               ृ
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        भााप रहाी हाै और सूच्चोाई भाी भाली भाांनि� जाान चकी हाै। इसूनिलए मनिहाला   शल्किक्� देने का प्रर्याासू थाा। राज्र्या छोटूा हाो, राज्र्या बीड़ेा हाो, राज्र्या की
                                                                   े
        आरक्षाण निवरोधा करके जाो पाप निवपक्षा ने निकर्याा हाै, इसूकी उन्हां सूजाा जारूर   आबीादेी कम हाो र्याा राज्र्या की आबीादेी ज्र्याादेा हाो। सूबी की सूमान
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        निमलगोंी। इन देलं ने सूनिवधाान निनमा��ाओं की भाावनाओं का भाी अपमान   अनपा� मं शल्किक्� बीढ़ाने की कोनिशश थाी। लनिकन इसू ईमानदेार प्रर्याासू
                                                                ु
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        निकर्याा हाै। जान�ा द्वाारा इसूकी सूजाा सूे भाी वो बीच नहां पाएगोंे।  की कांग्रासू और उसूके सूहार्याोनिगोंर्यां ने सूदेन मं परे देेश के सूामने भ्रूण
                                                                                               ू
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        छीनने नहं, सबको कुछ �ने का दिबले र्थाा: सूदेन मं नारी शल्किक्�   हात्र्याा कर देी हाै, भ्रूण हात्र्याा कर देी हाै। र्याे कांग्रासू, टूीएमसूी, सूमाजावादेी
                                                                         ै
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        वदेन सूशोधान निकसूी सूे भाी कुछ निछनने का नहां थाा। नारी शल्किक्� वदेन   पाटूी, टूीएमके जासूे देल, इसू भ्रूण हात्र्याा के गोंुनहागोंार हां।
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        सूशोधान हार निकसूी को कुछ न कुछ देने का थाा, देने के निलए सूशोधान   मदिहलेाओं के पक्षे मं �ड़ीे होने का अंवासर �ोया: मझाे व्र्याल्किक्�गों�
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        का थाा। र्याे 40 सूाल सूे लटूके हाुए नारी के हाक को, 2029 के अगोंल  े  �ौर पर आशा थाी निक कांग्रासू अपनी देशकं परानी गोंल�ी सूुधाारगोंी।
                                                                                े
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        लोकसूभाा चनाव सूे उसूका हाक देने का सूशोधान थाा। नारी शल्किक्� वदेन   कांग्रासू अपने पापं का प्रार्याल्किश्च� करेगोंी, लनिकन कांग्रासू ने इनि�हाासू रचने
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