Page 55 - NIS Hindi 16-30 June,2023
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अंतरराष्ट्ीय पीएम मोदी का नवदेश दौरा
में सुधार को मूत्ष रूप वदया जाए। इनको गलोबल साउथ की आिाज
भी बनना होगा। िरना हम संघरषों को खतम करने पर वसफ्क चचा्ष
पूणवि बहुमत ्ालिी सरकार का प्ररतरनरध ही करते रह जाएंगे। संयु्त राषट् और उसकी सुरक्ा परररद मात्
जब र्श् के सामन कोई बात बताता है तो एक टॉक शॉप बन कर रह जाएंगे। भारत का हमेशा यह मत रहा है
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दुरनया य र्श्ास करती है रक य अकेलिा वकसी भी तनाि या वििाद का समाधान शांवतपूण्ष तरीके से बातचीत
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के जररये वकया जाना चावहए। अगर कानून से कोई हल वनकलता है
नहीं बोलि रहा है, 140 करोड़ लिोग बोलि रह रे तो उसे मानना चावहए। इसी भािना से भारत ने बांगलादेश के साथ
हैं। इस यात्रा में रजतना समय उपलि्ध था अपने लैंड और मैरीटाइम बांउड्ी का हल वकया था।
उसका पलि-पलि मैंन दश की बात करन में िकशिक शांवत, करथरता और समृवधि सब का साझा उद्शय
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दश की भलिाई के रलिए रनणविय लिरेन में पूरी है। आज के समय में जब विशि के सभी देश वकसी न वकसी
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तरह स उपयोग रकया। रूप में एक-दूसरे से जुड़े हैं, ऐसे में वकसी भी एक क्ेत् में तनाि
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होता है तो सभी देश इससे प्भावित होते हैं। विकासशील देश
- नरेंद्र मोदी, प्रधानमंत्री वजसके पास सीवमत संसाधन हैं, इन पररकरथवतयों में सबसे जयादा
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प्भावित होते हैं। ित्षमान िकशिक करथवत के चलते खाद्-पदाथ्ष,
तेल और उि्षरक संकट का सबसे गहरा प्भाि इनहीं देशों पर
कराया। संयु्त राषट् की रथापना और उसके उद्शयों के साथ- पड़ता है। प्धानमंत्ी मोदी का कहना है वक आज हम इवतहास के
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साथ आतंकिाद पर एक राय और पररभारा नहीं बन पाने पर एक महतिपूण्ष मोड़ पर खड़े हैं। अनेक संकटों से ग्ररत विशि में
प्धानमंत्ी मोदी ने वचंता वय्त की और कहा वक यह समय आ जलिायु पररित्षन, पया्षिरण और ऊजा्ष सुरक्ा आज के समय की
गया है जब इसमें सुधार की जरूरत है। सबसे बड़ी चुनौवतयों में से है। इन बड़ी चुनौवतयों का सामना करने
में एक बाधा यह है वक हम जलिायु पररित्षन को केिल ऊजा्ष के
20वीं सदी में बने संसर्ान 21वीं सदी पररप्क्य से देखते हैं, हमें अपनी चचा्ष का रकोप बढाना चावहए।
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की वयवसर्ा के अनुरूप निीं
प्धानमंत्ी नरेंद् मोदी ने जी-7 की बैठक में कहा यह सोचने की बात जी- 7 में भारत की ओर
है वक हमें शांवत और करथरता की बातें अलग-अलग फोरम में ्यों
करनी पड़ रही है। संयु्त राषट् वजसकी शुरुआत ही शांवत रथावपत से डदए गए सुझाि
करने की कलपना से की गई थी, आज वििाद रोकने में सफल ्यों
नहीं होता। संयु्त राषट् में आतंकिाद की पररभारा तक मानय नहीं n समावेशली फू्ल दससटम का दनमा्णर हो।
हो पाई है। इन सब बातों से एक बात रपषट होती है वक वपछली सदी n वैश्वक उव्णरक सप्ाई चिेन को मजबूि करना होिा।
में बनाये गए इंरटीट्शनस इ्कीसिीं सदी की वयिरथा के अनुरूप
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n फदट्ड्ाइजर ररसोस्ण पर कबजा करने वा्ली दवसिारवािली
नहीं है। इसवलए जरूरी है वक संयु्त राषट् जैसे बड़े इंरटीट्शनस मानदसकिा पर रोक ्िानली होिली।
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n द्लदजट् टेक्ो्ॉजली का ्ाभ दव्व के हर दकसान िक
पहुंचिना चिादहए।
n ऑिदेदनक फू्ल को फैशन या वयापार के िौर पर नहीं
बशलक पोषर और सवास्थय से जोडना चिादहए।
n खाद् पिाथगों कली बबा्णिली को रोकने के द्ए सामूदहक
दजममेिारली होनली चिादहए।
परंपरािि िवाइयों का प्रसार और इसमें संयु्ि रूप से
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अनुसंरान हो।
न्यू इंडि्ा समाचार 16-30 जन 2023 53
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