Page 60 - NIS Hindi 16-30 June,2023
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राष्ट्   अमृत महोतसव













                                         स्वामी सहजवानंद सरस्ती


                                         नकसानों को संगनठत कर सवतंरिता


                                         आंदोलन में जगाई नई चेतना



                                         जनम : 22 फर्री 1889, मृतयु : 26 जून 1950

                  वक     सानों को संगवठत करने िाले रिामी सहजानंद   के वकसानों को एकवत्त करने का काम वकया। रिामी


                                                                                             ू
                                                                                                         े
                                                                  सहजानंद ने वबहार को अपनी कम्षभवम बनाकर अग्रजी
                         सररिती  का  जनम  22  फरिरी  1889  को
                                                                                                        ं
                  उत्रप्देश के गाजीपुर में हुआ था। पहले उनका नाम   साम्राजय के वखलाफ संघर्ष वकया। उनहोंने 1937-38 में
                  निरंग  राय था। वकसानों  के वहतों  के वलये  संघर्षरत   वबहार में बाकाशत आंदोलन शुरू वकया। वजसका अथ्ष
                                         ु
                  सहजानंद एक प्वतभाशाली बवधिजीिी, सश्त लेखक       था जो खेती करेगा, उसी का हक। इस आंदोलन ने जोर
                  और  समवप्षत  क्ांवतकारी  थे।  सहजानंद  सररिती  का   पकड़ा और वकसानों के अवधकारों की सुरक्ा के वलए
                                                                                                      ू
                  जीिन वकसानों के अवधकारों की रक्ा के वलए समवप्षत   वबहार काशतकार अवधवनयम और बाकाशत भवम कर
                  रहा। विदेशी हुककूमत विारा वकये जा रहे शोरण के वखलाफ   पाररत वकया गया।

                                                         ं
                  लाखों  वकसानों  को  संगवठत  कर  उनहोंने  रितत्ता   सहजानंद सररिती ने वबहटा की डालवमया शुगर
                  आंदोलन में नई चेतना जगाई। संनयासी सहजानंद न  े  वमल में सफल संघर्ष का नेतृति वकया। भारत छोड़ो
                  मुखर होकर आजादी के आंदोलन में वहरसा वलया। जब    आंदोलन के दौरान जब उनहें वगरफतार कर वलया गया
                                                                                           ं
                  जमींदार वकसानों से जबरन कर िसूली में जुटे थे तब   तो सुभार चद् बोस और ऑल इवडया फारिड्ट बलॉक
                                                                           ं
                  उनहोंने “कैसे लोगे मालगुजारी, लट्ठ हमारा वजंदाबाद”   ने वब्रवटश राज विारा उनकी वगरफतारी के विरोध में 28
                                                                     ै
                  का नारा वदया। उनहोंने कहा था वक “जो अन्न, िरत्   अप्ल का वदन अवखल भारतीय रिामी सहजानंद वदिस
                  उपजाएगा, अब िो कानून बनाएगा, ये भारतिर्ष उसी    के रूप में मनाने का फैसला वकया। सुभार चद् बोस न  े
                                                                                                    ं
                  का है, अब िही शासन चलाएगा।”                     कहा, “हमारे देश में रिामी सहजानंद सररिती एक
                                           ं
                     उनहोंने  1929  में  वबहार  प्ातीय  वकसान  सभा  के   ऐसा नाम है वजसके नाम पर शपथ और संकलप वलया
                  गठन के साथ वकसान सभा आंदोलन की शुरूआत की।       जाना चावहए। भारत में वकसान आंदोलन के वनवि्षिाद
                  इस सभा ने वकसानों को जमींदारों के वखलाफ संगवठत   नेता, आज िे जन-जन के आदश्ष और लाखों लोगों
                                       ं
                           ै
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                  वकया। अप्ल 1936 में काग्रस के लखनऊ अवधिेशन      के नायक बन गए हैं। उनहें रामगढ में ऑल इवडया
                                                                                                       ं
                  में अवखल भारतीय वकसान सभा का गठन वकया गया।      एंटी- कॉमप्ोमाइज कॉनफ्ेंस का अधयक् बनाया जाना
                  सहजानंद  सररिती  को  इस  सभा  का  पहला  अधयक्   वनकशचत रूप से सौभागय की बात रही। मेरे वलए एक
                  बनाया गया। अगरत 1936 में वकसान घोरणापत् जारी    वमत्, एक वचंतक और माग्षदश्षक के रूप में उनहें पाना
                  वकया गया और जमींदारी प्था समापत करने और ग्रामीण   बहुत बड़ा सममान है। उनके नेतृति का अनुसरण करत  े

                  ऋ ण रद् वकए जाने की मांग की गई। उनहोंने जमींदारी   हुए बड़ी संखया में वकसान आंदोलन के अग्रणी नेता
                  प्था का विरोध करने के साथ मजदूरों का नेतृति वकया।   फॉरिड्ट बलॉक से जड़े हैं।” 26 जून 1950 को उनका
                                                                                  ु
                  जावत, धम्ष, पंथ और सप्दाय से ऊपर उठकर देशभर     वनधन हो गया।
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