Page 51 - NIS Hindi 1-15 Feb, 2026
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रेंाष्ट्री रेंाष्ट्रीपीलिि कॉा सा�बोधान
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स्वर हाै। वषा� 2021 सीे �ताजीी की जीयती को ‘पराक्राम निदेवसी’
के रूप मं म�ाया जीाता हाै तानिक देेशवासीी, निवशषाकर यवा, ‘आदि� कमुकयोगी’ अब्रिभयाने
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उ�की अदेम्य देेशभल्किक्त सीे प्रेरणा प्राप्त करं। �ताजीी सीभाषा चाद्री
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बीोसी का �ारा ‘जीय निहादे’ हामारे राष्ट्रे-गौरव का उद्घोषा हाै। ‘आडिदो कोमाययूोगोी’ अडिभायूा� कोे मााध्यूमा से,
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जे�जेातीयू समादोायू कोे �ोगों मां �तृत्वा क्षेमाता
जीव�ि गणि�त्री कॉो बना रेंहाे हां शेक्ति�िशेा�ी
कोो डि�खारा गोयूा। डिवागोत वार्षं मां सरकोार �े,
हामारी ती�ं सी�ाओं के बीहाादेुर जीवा�, मातभूनिम की रक्षा के जे�जेातीयू समााजे कोे गोौरवाशा�ी इंडितहास
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निलेए सीदेैव सीतकफ रहाते हां। हामारे कत�व्यनि�ष्ठ पनिलेसीकमी तथेा से दोेशवााडिसयूं कोा परिरचायू कोरा�े कोे डि�ए
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कंद्रीीय सीशस्त्र पनिलेसी बीलें के जीवा�, देेशवानिसीयं की आंतरिरक सग्रीहा�यूं कोे डि�माायणी सडिहत अ�को कोदोमा
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सीुरक्षा के निलेए तत्पर रहाते हां। अन्नादेाता निकसीा�, देेशवानिसीयं उठाए हं। उ�कोे कोल्यूाणी और डिवाकोास कोो
के निलेए पोषाण सीामग्राी उत्पन्ना करते हां। देेश की कम�ठ और प्रााथाडिमाकोता दोी गोई है। स्वाास्थ्यू और डिशक्षेा कोे
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प्रनितभाशालेी मनिहालेाएं अ�ेक क्षत्रं मं �ए प्रनितमा� स्थेानिपत कोई अडिभायूा� जे�जेातीयू समादोायूं कोी डिवारासत
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कर रहाी हां। सीवाधामी �ॉक्�र, �सी� और सीभी स्वास्र्थ्य-कमी
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देेशवानिसीयं के स्वास्र्थ्य की देे�भाले करते हां। नि�ष्ठावा� सीफाई और डिवाकोास कोा समान्वायू कोर रहे हं।
निमत्र, देेश को स्वच्छे र��े मं प्रम� भूनिमका नि�भाते हां। प्रबीुद्ध
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निशक्षक, भावी पीनिढ़यं का नि�मा�ण करते हां। निवश्व-स्तरीय
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वैज्ञाानि�क और इंजीीनि�यर, देेश के निवकासी को �ई निदेशाएं देेते लिडलिजटी� पीमटी
हां। महा�ती श्रनिमक भाई-बीहा�, राष्ट्रे का �व-नि�मा�ण करते हां। हामारे देेशवानिसीयं �े नि�निजी�ले पम� व्यवस्थेा को बीहाुत बीड़ाे पमा�े
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हाो�हाार यवा और बीच्चे, अप�ी प्रनितभा और योगदेा� सीे देेश के पर अप�ाया हाै। आजी निवश्व के आधाे सीे अनिधाक नि�निजी�ले लेे�देे�
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स्वनिण�म भनिवष्य के प्रनित निवश्वासी मजीबीूत करते हां। प्रनितभाशालेी भारत मं हाोते हां। छेो�ी सीे छेो�ी देका� मं सीामा� �रीदे�े सीे लेेकर
कलेाकार, निशल्पकार और सीानिहात्यकार, सीमृद्ध परंपराओं को ऑ�ो-रिरक्शा का निकराया देे�े तक, नि�निजी�ले भुगता� का उपयोग
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आधाुनि�क अनिभव्यल्किक्त देे रहाे हां। अ�ेक क्षत्रं के निवशषाज्ञा, देेश के निवश्व सीमदेाय के निलेए प्रभावशालेी उदेाहारण बी� गया हाै।
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बीहाुआयामी निवकासी को निदेशा देे रहाे हां। ऊजीा�वा� उद्यामी, देेश को
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निवकनिसीत और आत्मनि�भ�र बी�ा�े मं अप�ा योगदेा� देे रहाे हां। ऑपीरेंशेन लिसा�देरें
निपछेलेे वषा�, हामारे देेश �े, ऑपरेश� निसीदेूर के द्वाारा, आतंकवादे
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बेटीी बचाओ, बेटीी पीढ़ाओ के निठका�ं पर सी�ीक प्रहाार निकया। आतंक के अ�ेक निठका�ं को
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मनिहालेाओं का सीनिक्राय और सीमथे� हाो�ा देेश के निवकासी के निलेए ध्वस्त निकया गया तथेा बीहाुत सीे आतंकवानिदेयं को उ�के अजीाम
अत्यंत महात्वपण� हाै। उ�के स्वास्र्थ्य, निशक्षा, सीुरक्षा एवं आनिथे�क तक पहाुंचााया गया। सीुरक्षा के क्षेत्र मं हामारी आत्मनि�भ�रता सीे
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सीशक्तीकरण के निलेए निकए जीा रहाे राष्ट्रेीय प्रयासीं सीे अ�ेक क्षत्रं ऑपरेश� निसीदेूर की ऐनितहाानिसीक सीफलेता को शल्किक्त निमलेी।
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मं मनिहालेाओं की भागीदेारी बीढ़ी हाै। ‘बी�ी बीचााओ, बी�ी पढ़ाओ’ यहा हामारा सीौभाग्य हाै निक हाम भारत-भनिम के नि�वासीी हां।
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अनिभया� सीे बीनि�यं की निशक्षा को प्रोत्सीाहा� निमलेा हाै। ‘प्रधाा�मत्री- हामारी जी��ी जीन्मभनिम के निलेए कनिव गुरु रवंद्री �ाथे ठाकुर �े
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जी� धा� योजी�ा’ के तहात अबी तक 57 करोड़ा सीे अनिधाक बींक �ाते कहाा थेा: ओ आमार दीशेर माटी, तोमार पंोरे ठेेकृाइ मा�ा।
�ोलेे जीा चाके हां। इ�मं मनिहालेाओं के �ाते लेगभग 56 प्रनितशत अ�ा�त, हाे मरे देेश की मा�ी! मं तुम्हाारे चारणं मं अप�ा शीश
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हां। बीहा�ं और बीनि�यां, परंपरागत रूनिढ़यं को तोड़ाकर आगे बीढ़ रहाी झीकाता हाूं।
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हां। पंचाायती राजी सींस्थेाओं मं मनिहालेा जी�प्रनितनि�निधायं की सींख्या मं मा�ती हाूं निक गणतंत्र निदेवसी, देेशभल्किक्त की इसी प्रबीले
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लेगभग 46 प्रनितशत हाै। मनिहालेाओं के राजी�नितक सीशक्तीकरण को भाव�ा को और भी सीदेढ़ कर�े के सींकल्प का अवसीर हाै। आइए,
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�ई ऊंचााई देे�े वालेे ‘�ारी शल्किक्त वदे� अनिधानि�यम’ सीे मनिहालेाओं हाम सीबी निमलेकर ‘राष्ट्रे प्रथेम’ की भाव�ा सीे काय� करते हाुए
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के �तृत्व द्वाारा निवकासी की सीोचा को अभूतपव� शल्किक्त निमलेेगी। अप�े गणतंत्र को और भी गौरवशालेी बी�ाएं। n
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