Page 2 - NIS Hindi 1-15 June, 2026
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वि�श्� पर्याा��रण वि��स : 5 जूून




                                                                                   ृ
                         भाारत कीी संंस्कृतित मेंं





                                     ृ
                          प्रकीतित भाी और प्रगतित भाी






                         भाारत कीी हजाारं सााल पुुरानीी
                          सास्कृ ृ तित मेंं, प्रकी ृ तित की सााथ-
                            ं
                                              े
                                                                 वि�काास और पर्याा��रण मेंं संतुुलन हमेंारी
                                                     े
                       सााथ प्रगतित भाी मेंौजाूद है। हमेंार
                                                                 परातुन परपरा काा एका अहमें हिहस्साा ह,
                                                                                                        ै
                                                                            ं
                                                                   ु
                        पुूर्ववजां कीी कीामेंनीा थी - पुथ्वीी�
                                                 ृ
                                                                  जि�सकाो हमें आत्मविनर्भर र्भारतु काी र्भी
                                                                                         �
                         पुू� च उर्वी भार्व। अथात सांपुूर्ण  व
                                                                                               ृ
                                                               तुाकातु बना रह ह। �ी� और प्रकावितु का रिरश्तेे
                                                                             े
                                                                                ं
                                                                                                     े
                                    व
                         ृ
                        पुथ्वीी, सांपुूर्ण पुरिरर्वेश हमें साभाी
                                                               काा संतुुलन, �र्याष्टि� और समेंष्टि� काा संतुुलन,
                           की लिलए उत्तमें हो। जालर्वायुु
                             े
                                                                                               े
                                                                �ी� और जि�� काा संतुुलन हमें�ा से हमेंार
                                                                                                          े
                          पुरिरर्वतवनी की खतर सा निनीपुटनीे
                                           े
                                    े
                                              े
                                                                                        ै
                                                               �ास्त्ं ने हमेंं जिसखाार्याा ह। हमें �ो र्भी अपने
                              े
                             की लिलए आजा जाो र्वैश्वि�की
                                                                                                         े
                                                                 जिलए कारतुे ह, उसकाा सीधाा असर हमेंार
                                                                              ं
                               प्रयुासा चल रहे हं, उनीमेंं
                                                                पर्याा��रण पर र्भी पड़तुा ह। इसजिलए अपने
                                                                                         ै
                          भाारत एकी आशा कीी किकीरर्ण
                                                                                          े
                                                                                                          े
                                                                  ं
                                                                ससाधानं काी दक्षतुा काो लकार र्भी र्भारतु का
                        बनीकीर उभारा है। जालर्वायुु और
                                                                                            ं
                                                                                          े
                                                                            प्रर्याास बढ़ रह ह।
                           पुयुार्वरर्ण कीी रक्षाा की लिलए
                                                े
                                                                              ं
                           राष्ट्र और नीागरिरकी सांगठि�त                - नरेंद्र मोोदीी, प्रधाानमोंत्रीी
                           प्रयुासा साे ही हमें आनीे र्वाली
                                           ं
                         पुीढ़ि�युं कीो दे पुाएगे साुरक्षिक्षात
                                          पुयुार्वरर्ण…
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