Page 12 - NIS Hindi 1-15 June, 2026
P. 12
आ�रण काथाा
वि�काास याात्राा का े
�र्षष
ू
ू
परा नहां हाोता हाै। देेश को पण�ता तक जााना हाै। इसूी सूंकल्प के
ं
सूाथे भाारत ने अमृत काल की र्याात्रा प्रारभा की हाै जाहाां शत-प्रनितशत
ं
गूांवं मं सूड़ोकं हां, शत-प्रनितशत परिरवारं के बींक अकाउ� हाो,
शत-प्रनितशत पात्र जारूरतमदे के पासू आंर्याष् मान भाारत का�ट हाो,
ु
ं
शत-प्रनितशत पात्र व् र्याम्मिक् तर्यां के पासू उज्ज्वला र्याोजाना का गूसू
ै
े
कनक् शन हाो, सूरकार की बीीमा र्याोजाना हाो, पंशन र्याोजाना हाो र्याा
आंवासू र्याोजाना हार उसू व्र्याम्मिक्त को इन र्याोजानाओं सूे जाोड़ोना हाै जाो
ु
इसूके हाकदेार हां। प�री और फ�पाथे पर बीैठकर सूामान बीेचने
ं
वालं को स्वनिननिधा र्याोजाना के जारिरए बीनिकगू व्र्यावस्थेा सूे जाोड़ोा जाा
ं
रहाा हाै। देेश आंजा हार घार नल सूे जाल निमशन को लेकर तजाी सूे
े
�
े
काम कर रहाा हाै। सूवागूीण-सूव�सूमावशी-सूव�स्पशी निवकासू की
सूोच सूे कद्री सूरकार र्याहा सूुनिनम्मिश्चत कर रहाी हाै निक सूमाजा की
ं
निवकासू र्याात्रा मं कोई व्र्याम्मिक्त, वगू� न छो�े, कोई भाू-भाागू, देेश का
ू
कोई कोना पीछोे नहां छो�ना चानिहाए। चाहाे नारी शम्मिक्त हाो र्याा र्यावा
ु
ू
शम्मिक्त, निकसूान हाो र्याा गूरीबी-वनिचत, सूोच केवल एक हाी हाै- निवकासू
ं
�
सूवागूीण हाोना चानिहाए। देेश के ऐसूे क्षत्रं को भाी आंगूे लाने के निलए
े
ू
ू
निपछोले 12 वषां मं प्रर्याासू निकए गूए हां। पवी भाारत, पवोत्तर, जाम् मू-
ू
कश् मीर, लद्देा� सूनिहात परा निहामालर्या क्षेत्र, त�वती क्षेत्र, आंनिदेवासूी
अंचल, भानिवष् र्या मं भाारत की निवकासू र्याात्रा के बीहाुत बीड़ोे आंधाार बीन
ु
रहाे हां। इन सूभाी के निलए सूशासून का ऐसूा मंत्र हाो जाो बीहाुमत की
बीजााए सूव�सूम्मनित की सूोच को बीढ़ाावा देेता हाै और “सूबीका सूाथे,
सूबीका निवकासू, सूबीका निवश्वासू और सूबीका प्रर्याासू” निजासूका ध्र्यार्या
े
वाक्र्या बीन चका हाै। एक ऐसूे भाारत के निनमा�ण की ओर राष्ट्र बीढ़ा
ु
रहाा हाै जाहाां गूरीबीी, गूदेगूी, भ्रष्�ाचार, आंतंकवादे, जाानितवादे और
ं
सूांप्रदेानिर्याकता सूे मम्मिक्त निमले।
ु
ू
लिवकॉलिसि भाारेंि कॉा मोज�ि होोिा मोागष
ं
ं
प्रधाानमत्री नरंद्री मोदेी लाल निकले की प्राचीर सूे लेकर कई मचं
पर ऐसूे कामं की सूूची निगूना चके हां जाो आंजाादेी के शुरुआंती वषां
ु
े
मं हाी हाो जााने चानिहाए थेे। लनिकन उनके बीारे मं स्थेार्याी सूमाधाान
की देीघा�कानिलक सूोच तबी नहां अपनाई गूई। ऐसूे मं जाो काम सूात
ं
ू
देशकं सूे लनिबीत र्याा कहां निक अ�के-ल�के पड़ोे थेे, उसूे मौजादेा
े
नतृत्व मं देेश आंजा सूाकार हाोते हाुए देे� रहाा हाै। अबी देेश को
निनर्यानित के भारोसूे नहां बीम्मिल्क एक स्पष्� सूोच, देीघा�कानिलक नीनित
ृ
और स्थेार्याी सूमाधाान के देम्मिष्�कोण सूे निवकासू की नई परंपराएं
स्थेानिपत हाो रहाी हां। इसूसूे उदेीर्यामान नए भाारत का निनमा�ण हाो रहाा
हाै। बीीते 12 वषां मं भाारत ने न केवल अपनी अथे�व्र्यावस्थेा का
आंकार देोगूना निकर्याा हाै, बीम्मिल्क आंधाुनिनक इंफ्राास्ट्रक्चर के कारण
ु
10 न्यूू इंंडि�यूा समााचाार // 1-15 जूून 2026

