Page 71 - NIS Hindi 1-15 June, 2026
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रेंाष्ट्र सवा औरें आध्यात्मो
� आ�ट ऑफू विलेवि�ंगु का स्थापना समाारोह
बंगलोुरु ने आध्याात्म और आध्याास्टित्मकी
चुेतना कीो नई ऊं ं चुाई तकी पहाचुायाा
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�ॉफ्टवेयरें औरें �ेवाओं क लिलोए मिवश्व भारें मेंं प्रसि�द्ध बंगलोुरु ना भाारेंत की �ंस्केमितक पहचााना, आध्येात्म औरें आध्येाप्तित्मक
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चाेतनाा को भाी नाई ऊचााइयं तक पहुंचााया है। आज मिवश्व भारें क लोोग भाारेंत क आध्येाप्तित्मक मेंूल्यं �े प्रभाामिवत हं औरें इन्हों
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प्राचाीना मेंूल्यं �े भाारेंत की अनाेक �ंस्थााए भाी प्रेरेंणा प्रा� करेंती रेंही हं। 10 मेंई को कनाा�क क बंगलोुरु मेंं दा आ�प ऑफॉ
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लिलोविंविग क 45वं स्थाापनाा व� �मेंारेंोह मेंं प्रधाानामेंंत्री नारेंद्र मेंोदाी नाे कहा क्रिक जब �ंकल्पो स्पी� हो औरें काय �ेवा की भाावनाा �े
क्रिकया जाए, तब प्रत्युेक प्रया� दाेता है �ु�दा परिरेंणामें…
दे ं ू ु प्राणार्यााम की परंपरा। पीएम मोदेी ने जाोर देेकर कहाा निक आंजा निवश्व भार
आं�ट ऑफ निलनिवगू का बीीजा 45 वषा� पव� श्री श्री रनिवशंकर ने
बीोर्याा थेा, जाो आंजा एक निवशाल व�वृक्ष का रूप ले चका हाै।
के लोगू भाारत के आंध्र्यााम्मित्मक मूल्र्यां सूे प्रभाानिवत हां और इन्हां प्राचीन
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दे आं�ट ऑफ निलनिवगू के स्थेापना वषा� सूमारोहा मं प्रधाानमत्री
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नरद्री मोदेी ने कहाा, “आंजा र्याहा हामारे सूामने एक निवशाल व� वृक्ष के मूल्र्यां सूे भाारत की अनेक सूंस्थेाएं भाी प्रेरणा प्राप्त करती रहाी हां।
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पराणं की प्राचीन निशक्षाओं मं उल्ल� हाै निक देसूरं की सूवा करना
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रूप मं �ड़ोा हाै, निजासूकी हाजाारं शा�ाएं निवश्व भार मं असूंख्र्या लोगूं के पुण्र्या हाै, जाबीनिक देसूरं को पीड़ोा पहाुंचाना पाप हाै। सूवा भाारतीर्या सूमाजा
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जाीवन को छोू रहाी हां।” भाारत की भााषााओं, परंपराओं, रीनित-रिरवाजां और का स्वाभाानिवक चरिरत्र हाै। भाारत के अनेक आंध्र्यााम्मित्मक आंंदेोलनं ने
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उपासूना पद्धनितर्यां सूे सूमृद्ध निवनिवधाता हाै। इन सूंदेर निवनिवधाताओं को एक अंततः मानवता की सूवा के रूप मं स्वर्यां को अनिभाव्र्याक्त निकर्याा हाै।
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सूूत्र मं क्र्याा बीांधाता हाै। इसूका उत्तर हाै-स्वर्यां के निलए नहां, बीम्मिल्क देसूरं र्याहाी भाावना दे आं�ट ऑफ निलनिवगू के प्रत्र्याेक प्रर्याासू मं भाी निदे�ाई देेती
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के निलए जाीना। भाारत के मूल्र्यां मं गूहाराई सूे निननिहात र्याोगू, ध्र्याान और हाै। पीएम मोदेी ने कहाा निक भाारत के सूमग्री निवकासू को आंगूे बीढ़ााने मं
दे आं�ट ऑफ निलनिवगू जासूी सूंस्थेाओं की महात्वपण� भानिमका हाै। उन्हांने
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निकसूानं को प्राकनितक �ती सूे जाोड़ोने पर ध्र्याान देेने का आंग्रीहा करते
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बंगलुरू काा मेंाहौल...र्याहां काा �ातुा�रण...काछ हाुए कहाा निक स्थेार्याी कनिषा स्वर्यां “आं�ट ऑफ निलनिवगू” की अनिभाव्र्याम्मिक्त हाै
अलग ही होतुा ह। र्याे �हर software और तथेा रसूार्यानं सूे धारती माता की रक्षा करना आंध्र्यााम्मित्मक सूाधाना और
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services का जिलए दुविनर्याा र्भर मेंं �ाना �ातुा पर्याा�वरण सूंरक्षण, देोनं का प्रतीक हाै। प्राकनितक �ती को अपनाना
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ह। लेकिकान र्भारतु काी सांस्कावितुका पहचेान... और धारती माता को रसूार्यानं सूे बीचाना, र्याहा भाी आं�ट ऑफ निलनिवगू हाै।
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प्रधाानमत्री मोदेी ने “पर ड्रॉॉप, मोर �ॉप” पहाल के माध्र्याम सूे निकसूानं
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Spirituality...आध्यात्मित्मका चेेतुना काो र्भी के बीीच बीहातर जाल प्रबीधान पद्धनितर्यां को अपनाने की आंवश्र्याकता पर
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इस �हर ने नई ऊचेाई दी ह।
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बील निदेर्याा। पानी की हार बींदे बीचाना भाी आं�ट ऑफ निलनिवंगू हाै। n
- नरेंद्र मोोदीी, प्रधाानमोंत्रीी प्रेधाानमोंत्रीी कॉा पीरेंा कॉायषक्रमो दाेखने
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कॉे लि�ए QR कॉोड स्कॉैन कॉरेंं।
न्यूू इंंडि�यूा समााचाार // 1-15 जूून 2026 69

