Page 76 - NIS Hindi 1-15 June, 2026
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सुरदार वाल्लीभाभााई पुटेल केो श्रे�ंजूलिल

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               प्रधानमोत्री मोोदोी ने गाुजरात केे साोमोनाथ मों सारदोार वल्लेभभाई पूटले केो भावभीनी श्रे�ांजसिले असिपूणत
                                                          े
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               केी। उन्हंने केहा सिके साोमोनाथ मोसिदोर केे पूुनसिनणमोाणर्ण मों सारदोार पूटले केी दोूरदोश्चिष्ट और दोढ़ा साकेल्पू ने
                                                                 ृ
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               सिनर्णाणयोंके भसिमोकेा सिनभाई। उन्हंने इसा बात पूर प्रकेाश डालेा सिके साोमोनाथ केो भारत केी साभ्योंतागात गाौरव
                                                                ु
               और आध्योंाश्चित्मोके सिनरंतरता केे प्रतीके केे रूपू मों अपूने पूूरे वैभव केे सााथ पूनः स्थासिपूत होते दोेखना सारदोार
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               पूटले केा सापूना था। दोेश सारदोार पूटले केे इसा सिवजन केो सााकेार केरने केे प्रसित सादोा प्रसितब� रहेगाा।
               रोमंंर्चके फ्लााईपुास्टे केा किकेया अंवालोके�
               साोमोनाथ अमोृत मोहोत्साव केे शुभ अवसार पूर पूीएमो मोोदोी ने भारतीयों वायोंु साना केी सायोंणसिकेरर्ण
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               एरोबसिटके टीमो द्वाारा प्रस्तुत एके रोमोांचके फ्लेाईपूास्ट केा अवलेोकेन सिकेयोंा। उन्हंने केहा सिके
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                                                                      ं
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               आकेाश मों गाौरव और शौयोंण केा भव्यों सागामो साोमोनाथ मोसिदोर पूर केेसारिरयोंा एवं सितरगाे केा प्रकेाश फलेा
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               रहा था। भश्चिक्त और शश्चिक्त केी योंह अद्भुत छटा प्रत्योंके हृदोयों केो गाहन आनदो साे भर दोती है और
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                                                                  ं
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               प्रत्योंके भारतीयों केो गाौरवाश्चिन्वत केरती है।
                                                               प्रेधाानमोंत्रीी कॉा पीरेंा कॉायषक्रमो दाेखने
                                                                        ू
                                                               कॉे लि�ए QR कॉोड स्कॉैन कॉरेंं।
               आंध्र्यााम्मित्मक चेतना को, निजासूने मानव मात्र के कल्र्यााण की सूी� सूमचे
                                                             ू
               निवश्व को देी हाै। मं र्याहाां देे� रहाा हाूं, भाारत के उसू अनिवनाशी स्वरूप को,
               निजासूे सूनिदेर्यां के कम्मित्सूत प्रर्याासू भाी न निम�ा सूके, न हारा सूके। और मं र्याहाां
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               देे� रहाा हाूं, सूोमनाथे अमृत-महाोत्सूव, र्याे केवल अतीत का उत्सूव नहां
               हाै, र्याे अगूले एक हाजाार वषां के निलए भाारत की प्रेरणा का महाोत्सूव भाी हाै।
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               सोमोनाथा अमोि मोहोोत्सव मों पीीएमो मोोदाी होुए शाालिमो�
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               भाारत  के  बीारहा  ज्र्याोनितनिल�गूं  मं  सूे  एक  और  भाारत  की  अ��
               आंस्थेा  और  सूभ्र्यातागूत  निवरासूत  के  प्रतीक  पनिवत्र  सूोमनाथे
               मनिदेर मं प्रधाानमत्री मोदेी ने सूोमनाथे अमृत महाोत्सूव मं भाागू
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               निलर्याा। सूमारोहां के भाागू के रूप मं उन्हांने कई शभा धाानिम�क और
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               सूांस्कनितक कार्या��मं मं भाागू निलर्याा और ध्वजाारोहाण सूमारोहा मं
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               शानिमल हाुए। इसू अवसूर पर सूोमनाथे की सूमृद्ध निवरासूत और
               आंध्र्यााम्मित्मक महात्व को र्याादे करते हाुए एक स्मारक �ाक नि�क�
               और निसूक्का भाी जाारी निकर्याा गूर्याा।              सोमोनाथा मोलिदारें कॉी एकॉ िस्वीरें कॉी साझाा
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               सोमोनाथा मोलिदारें मों मोहोापीजा औरें कॉभाालिभार्षकॉ  सूोमनाथे सूे व�ोदेरा जााते सूमर्या ली गूई सूोमनाथे मनिदेर की एक
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               प्रधाानमत्री नरद्री मोदेी ने गूजारात र्याात्रा के देौरान सूोमनाथे मनिदेर म  ं  तस्वीर पीएम मोदेी ने सूाझौा की। सूाथे हाी उन्हांने उल्ले� निकर्याा निक
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               महाापूजाा और कुंभाानिभाषाेक भाी निकर्याा। उन्हांने कहाा निक ऐसूा महाान   प्रभाासू पा�न के त� पर म्मिस्थेत सूोमनाथे मनिदेर भाम्मिक्त, इनितहाासू और
                                                                                                  ं
               सूौभााग्र्या प्राप्त हाोना उनके जाीवन के सूबीसूे भाावुक और अनिवस्मरणीर्या   सूभ्र्यातागूत भाावना के एक तजास्वी प्रतीक के रूप मं शान सूे �ड़ोा हाै।
                                                                                       े
               क्षणं मं सूे एक हाै। पुननिन�निम�त सूोमनाथे मनिदेर के 75 वषा� परे हाोन  े  उन्हांने इसू बीात पर प्रकाश �ाला निक र्याहा शाश्वत मनिदेर बीबी�र हामलं,
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                                                          ू
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               के उपलक्ष्र्या मं आंर्याोनिजात इसू निवशषा अवसूर पर महाादेेव की पूजाा   आं�मणं और सूनिदेर्यां के बीीतने के बीावजाूदे अनि�गू रहाा हाै। सूोमनाथे
               करना एक अनिवस्मरणीर्या अनुभाव हाै। उन्हांने र्याहा भाी कहाा निक देश�न
                                                                    प्रत्र्याेक भाारतीर्या को शम्मिक्त, सूाहासू और आंशा प्रदेान करता हाै। n
               एवं पूजान असूीम आंध्र्यााम्मित्मक ऊंजाा� का स्रोोत हाै।
               74  न्यूू इंंडि�यूा समााचाार // 1-15 जूून 2026
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