Page 8 - NIS HINDI 1-15 May, 2026
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लि�शेेष  पीीएम कॉा आ�ेख




               मूहाात्माा ज्योोवि��ावा फुलेे
                                                                                           ु





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                भाा�� के दि�व्य पथ-प्र�शेके
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                                            इस वार्ष 11 अप्रैैल केो र्माहैा� सर्मााज सुधैाराके र्माहैात्माा ज्योोवितराावा
                                                   व
                                                                                    ू
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                                             फुल केी 200वां जयोती सर्मााराोहैं केा र्माहैत्वपण शुभूाराभू हैुआ
                                                                                            ं
                                                                                      व
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                                           हैै। इस विवाशर्ष अवासरा केो चिचुह्नि�त केरा�े के लिलए प्रैधैा�र्मांत्री �राद्र
                                            र्माोदाी �े एके लेख लिलखकेरा साझाा किकेयोा किके र्माहैात्माा फुल आज
                                                                                              े
                                                                                           ु
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                                            भूी अ�ेके लोगं के लिलए प्रैराणापुज हैं औरा शिशक्षाा, ज्ञाा� तथा ज�
                                           केल्यााण परा उ�केा जोरा वातर्माा� सर्मायो र्मां भूी हैै अत्यंत प्रैासंनिगके…
                                                                   व
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                 नारींद्र मोोदीी                   हाान सूमाजा सूुधाारक महाात्मा फुुले का जाीवन ननि�क सूाहासू, आत्म
                                                                                      ै
                 प्रधाानमंत्रीी
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                                                   निच�न और सूमाजा के निहा� के निलए अटूूटू सूमप�ण का प्रेरक उदेाहारण
                                           म हाै। महाात्मा फुुले को केवल उनकी सूंस्थााओं र्याा आदेोलनं के निलए हाी
                                                                                       ं
                                          र्याादे नहां निकर्याा जाा�ा, बील्किल्क उन्हांने लोगोंं के मन मं जाो आशा और आत्मनिवश्वासू
                                          जागोंार्याा, उसूका व्र्याापक प्रभााव हाम आजा भाी महासूसू कर�े हां। उनके निवचार
                                                                                 ू
                                          देेशवानिसूर्यां के निलए प्रेरणापुंजा हां।
                                             महाात्मा फुुले का जान्म 1827 मं महााराष्ट्र मं एक बीहा� सूाधाारण परिरवार मं हाुआ।
                                                                                 ु
                                          लनिकन शुरुआ�ी चनौनि�र्याां कभाी उनकी निशक्षाा, सूाहासू और सूमाजा के प्रनि� सूमप�ण
                                                        ु
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             बचपन सेे हीी महीात्माा       को नहां रोक पाईं। उन्हांने हामशा र्याहा माना निक चाहाे निक�नी भाी कनिठनाइर्याां क्र्यां न
                                                ं
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             फु ु लेे बहुत जि�ज्ञाासेु थेे   आएं, इसूान को महान� करनी चानिहाए, ज्ञाान हाानिसूल करना चानिहाए और सूमस्र्यााओं का
             और अपनी उम्र के              सूमाधाान करना चानिहाए, न निक उन्हां अनदेेखाा करना चानिहाए। बीचपन सूे हाी महाात्मा
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                                                ु
             अन्य बच्चों केी अपेक्षाा     फुुले बीहा� निजाज्ञाासूु थाे और अपनी उम्र के अन्र्या बीच्चों की अपेक्षाा कहां अनिधाक पुस्�कं
             केहीं अधि�के पुस्तके         पढ़�े थाे। वो कहा�े भाी थाे, “हाम निजा�ना ज्र्याादेा सूवाल कर�े हां, उनसूे उ�ना हाी अनिधाक
                               ं
                                                                                       ू
             पढ़ते थेे। वोो केहीते भीी    ज्ञाान निनकल�ा हाै।” सूाफु हाै निक बीचपन सूे निमली निजाज्ञाासूा उनकी परी र्याात्रा मं बीनी रहाी।
                                                                             ू
             थेे, “हीम जि�तना ज्याादाा       महाात्मा फुुले के जाीवन मं निशक्षाा सूबीसूे महात्वपण� निमशन बीनी। उनका मानना थाा
                                          निक ज्ञाान निकसूी एक वगों� की सूंपनि� नहां, बील्किल्क एक ऐसूी शल्किक्� हाै, निजासूे सूभाी के सूाथा
                          ं
             सेवोाले केरते ही, उनसेे
                                          सूाझाा निकर्याा जााना चानिहाए। जाबी सूमाजा के बीड़ेे निहास्सूे को निशक्षाा सूे वनिच� रखाा जाा�ा
                                                                                          ं
             उतना हीी अधि�के ज्ञाान
                                                                 ं
                                          थाा, �बी उन्हांने लड़ेनिकर्यां और वनिच� वगोंं के निलए स्कूल खाोले। वे कहा�े थाे, “बीच्चों
             निनकेलेता ही।”
                        ै
                                                                           ु
                                          मं जाो सूुधाार मां के माध्र्याम सूे आ�ा हाै, वहा बीहा� महात्वपण� हाो�ा हाै। इसूनिलए अगोंर
                                                                                  ू
                                          स्कूल खाोले जााएं, �ो सूबीसूे पहाले लड़ेनिकर्यां के निलए खाोले जााएं।” उन्हांने निशक्षाा को
                                          न्र्याार्या और सूमान�ा का माध्र्याम बीनार्याा।
                                                             ृ
                                             निशक्षाा के प्रनि� उनका देल्किष्टूकोण हामं आजा भाी बीहा� प्रेरिर� कर�ा हाै। निपछले एक
                                                                               ु
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                     प्रधाानमंत्रीी कॉा आ�ेख पीढ़ने   देशक मं भाार� ने र्यावाओं के निलए रिरसूच� और इनोवेशन को बीहा� प्राथानिमक�ा
                     कॉे लि�ए QR कॉोड स्कॉैन कॉरेंं।
                                          देी हाै। एक ऐसूा इकोनिसूस्टूम बीनाने का प्रर्याासू निकर्याा गोंर्याा हाै, निजासूमं र्यावा सूवाल
                                                                                             ु
         6  न्यूू इंंडि�यूा समााचाार // 1-15 माई 2026
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