Page 8 - NIS Hindi 1-15 Feb, 2026
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व्याक्ति�ित्व लिि�कॉा मा�झीी
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सथाल भिर्वद्रोोहै � नाय�
संथेाले आहिदीवासंी वितालेकाा मेंंझीी ने 1857 काी लेड़ेाई संे ताकारीबन 80 संाले
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पू�ले अंग्रेेजीं का खिखालेाफ धानुर्षो बार्ण का दीमें पूर �ी विवद्रो� छेड़े हिदीया थेा। उन्होंने
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आहिदीवासिसंयं काो एका संना का रूपू मेंं संंगठि�ता किकाया और 1784 मेंं प्रसिसंद्धा
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संथेाले विवद्रो� काा नेताृत्व किकाया। उन्होंने अपून संमेंुदीाय का संाथे वि�टि�र्श ईस्ट
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इंडि�या कापूनी का काोर्षोागार पूर छेापूा मेंार हिदीया थेा जिजीसंका काारर्ण उन्हों
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फंसंी काी संजीा दीी गई। उन्होंने न सिसंफ अंग्रेेजीं का खिखालेाफ
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अदीम्य संा�सं काा पूरिरचाय हिदीया बल्कि� संंघर्षोण संे संंपूूर्ण
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भाारता काो स्वतांत्रीताा �ासिसंले कारन का लिलेए किकाया प्रेरिरता…
n जीन्म: 11 फरवरी 1750 n शहीदीी डिदीवसा : 13 जीनवरी 1785
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रत का अतीत, इनितहाासी, वत�मा� और भनिवष्य थेा बील्किल्क उन्हां�े स्थेा�ीय सीदे�ोरं-जीमंदेारं के नि�लेाफ
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आनिदेवासीी सीमाजी के निबी�ा परा �हां हाोता। देेश भी मनिहाम छेेड़ाी थेी। 1778 मं उन्हां�े पहाानिड़ाया सीरदेारं सीे
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भा की आजीादेी की लेड़ााई का पग-पग, इनितहाासी निमलेकर रामगढ़ कंप को अग्राजीं सीे मुक्त करवाया। 1784 मं
का पन्नाा-पन्नाा आनिदेवासीी वीरता सीे भरा पड़ाा हाै। ऐसीे हाी एक राजीमहाले के मनिजीस्ट्रेे� क्लेीवले� को मार �ालेा। इसीके बीादे
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�ायक थेे नितलेका मांझीी, निजीन्हां�े नि�नि�श ईस्� इनि�या कंप�ी अग्राजी उ�के पीछेे पड़ा गए और आनि�रकार उन्हां निगरफ्तार कर
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की ज्यादेनितयं के नि�लेाफ सींघषा� निकया और निवदेेशी हाकूमत के निलेया गया। निगरफ्तारी के बीादे अग्राजी उन्हां घोड़ाे सीे बीांधाकर
नि�लेाफ सींग्रााम का निबीगले फूंक निदेया। वो भी तबी जीबी अग्राजीं के घसीी�ते हाुए भागलेपुर लेे गए। 13 जी�वरी 1785 को भागलेपुर
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नि�लेाफ कहां कोई निवद्रीोहा की बीात �हां हाो रहाी थेी। 1857 की के चाौराहाे पर एक निवशाले व�वृक्ष मं ले�का कर फांसीी देे देी।
क्राांनित सीे भी पहालेे 1784 मं सीथेाले मं उ�के �तृत्व मं ‘देानिम� यहाी वजीहा हाै निक नितलेका मांझीी को भारत का प्रथेम स्वतंत्रता
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सीत्याग्राहा’ लेड़ाा गया थेा। वहा ऐसीा सीमय थेा जीबी अग्राजी निकसीी सी�ा�ी भी कहाा जीाता हाै।
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� निकसीी तरहा सीे अप�ा निवस्तार करते जीा रहाे थेे। मां भारती को नितलेका माझीी के �ाम पर भागलेपुर मं नितलेका माझीी भागलेपुर
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धाीरे-धाीरे जींजीीरं के बीनिड़ायं मं जीकड़ा�े का प्रयासी कर रहाे थेे। निवश्वनिवद्याालेय हाै। सीाथे हाी बीाग्लेा की सीुप्रनिसीद्ध लेनि�का
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11 फरवरी 1750 को निबीहाार मं भागलेपुर के सीुल्ता�गजी मं महााश्वता देेवी �े उ�के जीीव� और निवद्रीोहा पर बीांग्लेा भाषाा मं
एक सीथेाले परिरवार मं जीन्मे नितलेका मांझीी �े अप�े बीहाादेरी के एक उपन्यासी ‘शालेनिगरर �ाके’ की रचा�ा की हाै निजीसीे निहादेी मं
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देम पर � केवले अग्राजीं के �ाक मं देम कर निदेया बील्किल्क अग्राेजीी ‘शालेनिगरहा की पकार पर’ �ाम सीे अ�वानिदेत और प्रकानिशत
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शासीकं को जीीते जीी कभी चा� की �ंदे सीो�े �हां निदेया। मांझीी निकया गया हाै। 29 अक्�बीर 2023 को प्रधाा�मत्री �रद्री मोदेी
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का असीले �ाम जीाबीरा पहाानिड़ाया बीताया जीाता हाै। कहाते हां निक �े म� की बीात काय�क्राम मं नितलेका मांझीी को यादे निकया थेा।
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नितलेका �ाम उन्हां अग्राजीं �े निदेया थेा। एक बीार एक अग्राजी �े उन्हां�े कहाा थेा निक भारतवषा� मं आनिदेवासीी योद्धाओं का सीमृद्ध
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इ�की घूरती लेाले आ�ं मं देे�ा थेा। देरअसीले पहाानिड़ाया भाषाा इनितहाासी रहाा हाै। इसीी भारत भनिम पर महाा� नितलेका मांझीी �े
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मं ‘नितलेका’ का अथे� गुस्सीले और लेाले-लेाले आ�ं वालेा अन्याय क नि�लेाफ निबीगुले फका थेा। सीाथे हाी 24 फरवरी 2025
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व्यल्किक्त हाोता हाै। देस्तावजीं मं यहा उ�की पहाचाा� बी� गई और को निबीहाार के भागलेपुर मं निवकासी कायं के शभारंभ अवसीर पर
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इनितहाासी मं नितलेका �ाम अमर हाो गया। नि�नि�श सीत्ताा के निवरुद्ध भी उन्हां�े कहाा थेा निक इसी धारती मं आस्थेा भी हाै, निवरासीत भी हाै
लेबीा सींघषा� कर�े वालेे नितलेका मांझीी �े अग्राजीं के सीाम�े कभी और निवकनिसीत भारत का सीामर्थ्य� भी हाै। ये शहाीदे नितलेका मांझीी
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भी सीमप�ण �हां निकया। � हाी कभी झीके और � हाी �रे। की धारती हाै, ये निसील्क निसी�ी भी हाै। इत�ा हाी �हां उन्हां�े अन्य
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उन्हां�े � केवले अग्राजीं के नि�लेाफ बीगावत का निबीगले फंका अवसीरं पर भी नितलेका मांझीी को श्रद्धापव�क �म� निकया हाै। n
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