Page 13 - NIS Hindi 1-15 Feb, 2026
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1000 वर्ष बााद 2026 मं भीी सोोमनााथ केा सोमुद्र अ�ानिदे काले सीे सीोम�ाथे जीीव� के हार क्षेत्र के लेोगं को
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उसोी ताीव्रताा सोे गजाशनाा केरीताा हो। ताट केो स्प�श जीोड़ाता आया हाै। सीनिदेयं पहालेे जी� परंपरा के आदेरणीय मुनि�
कनिलेकाले सीव�ज्ञा हाेमचाद्रीाचााय� यहाां आए थेे और कहाा जीाता हाै
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केरीताी �होरी उसोकेी पूरीी गाथा सोुनााताी हो। उना
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निक प्राथे��ा के बीादे उन्हां�े कहाा, “भवबीीजीाङ्कुरजी��ा रागाद्याा�
�होरीं केी तारीहो सोोमनााथ बाारी-बाारी उठताा रीहोा हो।
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क्षयमुपगता यस्य। अथेा�त्, उसी परम तत्व को �म� निजीसीमं
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सीांसीारिरक बीधा�ं के बीीजी �ष्� हाो चाके हां। निजीसीमं राग और
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तत्कालेी� प्रधाा�मत्री पनि�त जीवाहारलेाले �हारू इसी घ��ा सीभी निवकार शांत हाो गए हां।
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सीे अनिधाक उत्सीानिहात �हां थेे। वो �हां चााहाते थेे निक मा��ीय आजी भी देादेा सीोम�ाथे के देश�� सीे ऐसीी हाी अ�भनित हाोती
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राष्ट्रेपनित और मत्री इसी सीमारोहा का निहास्सीा बी�ं। उन्हां�े कहाा हाै। म� मं एक ठहाराव आ जीाता हाै, आत्मा को अदेर तक कछे
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निक इसी घ��ा सीे भारत की छेनिव �राबी हाोगी लेेनिक� राजीद्री बीाबीू स्पश� करता हाै, जीो अलेौनिकक हाै, अव्यक्त हाै।
अनि�ग रहाे और निफर जीो हाुआ, उसी�े एक �या इनितहाासी रचा निदेया। 1026 के पहालेे आक्रामण के एक हाजीार वषा� बीादे 2026 मं
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सीोम�ाथे मनिदेर का कोई भी उल्लेे� के.एम. मुंशी जीी के भी सीोम�ाथे का सीमद्री उसीी तीव्रता सीे गजी��ा करता हाै और त�
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योगदेा�ं को यादे निकए निबी�ा अधारा हा। उन्हां� उसी सीमय को स्पश� करती लेहारं उसीकी परी गाथेा सी�ाती हां। उ� लेहारं
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सीरदेार प�ले का प्रभावी रूप सीे सीमथे�� निकया थेा। सीोम�ाथे की तरहा सीोम�ाथे बीार-बीार उठता रहाा हाै।
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पर उ�का काय�, निवशषा रूप सीे उ�की पुस्तक ‘सीोम�ाथे, दे अतीत के आक्रामणकारी आजी सीमय की धाले बी� चाके हां।
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श्राइ� इ�र�ले’, अवश्य पढ़ी जीा�ी चाानिहाए। उ�का �ाम अबी निव�ाश के प्रतीक के तौर पर निलेया जीाता हाै।
जीसीा निक मुंशी जीी की पुस्तक के शीषा�क सीे स्पष्� हाोता हाै, इनितहाासी के पन्नां मं वे केवले फ��ो� हां, जीबीनिक सीोम�ाथे आजी
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हाम एक ऐसीी सीभ्यता हां जीो आत्मा और निवचाारं की अमरता मं भी अप�ी आशा निबी�ेरता हाुआ प्रकाशमा� �ड़ाा हाै। सीोम�ाथे
अ�� निवश्वासी र�ती हाै। हाम निवश्वासी करते हां- ��ं निछेन्देल्किन्त हामं ये बीताता हाै निक घणा और कट्टरता मं निव�ाश की निवकृत
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शस्त्रानिण ��ं देहानित पावक�। सीोम�ाथे का भौनितक ढांांचाा �ष्� ताकत हाो सीकती हाै, लेेनिक� आस्थेा मं सीजी� की शल्किक्त हाोती
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हाो गया लेेनिक� उसीकी चाेत�ा अमर रहाी। हाै। करोड़ां श्रद्धालेुओं के निलेए सीोम�ाथे आजी भी आशा का
इन्हां निवचाारं �े हामं हार काले�� मं, हार परिरल्किस्थेनित मं निफर अ�ंत �ादे हाै। ये निवश्वासी का वो स्वर हाै, जीो ���े के बीादे भी
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सीे उठ �ड़ाे हाो�े, मजीबीूत बी��े और आगे बीढ़�े का सीामर्थ्य� उठ�े की प्रेरणा देेता हाै।
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निदेया हाै। इन्हां मूल्यं और हामारे लेोगं के सींकल्प की वजीहा सीे अगर हाजीार सीाले पहालेे �नि�त हाुआ सीोम�ाथे मनिदेर अप�े
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आजी भारत पर देुनि�या की �जीर हाै। देुनि�या भारत को आशा और परे वैभव के सीाथे निफर सीे �ड़ाा हाो सीकता हाै, तो हाम हाजीार
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निवश्वासी की देल्किष्� सीे देे� रहाी हाै। वो हामारे इ�ोवनि�व यवाओं मं सीाले पहालेे का सीमृद्ध भारत भी बी�ा सीकते हां। आइए, इसीी
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नि�वेश कर�ा चााहाती हाै। हामारी कलेा, हामारी सींस्कनित, हामारा प्रेरणा के सीाथे हाम आगे बीढ़ते हां। एक �ए सींकल्प के सीाथे, एक
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सीगीत और हामारे अ�ेक पव� आजी वल्किश्वक पहाचाा� बी�ा रहाे निवकनिसीत भारत के नि�मा�ण के निलेए। एक ऐसीा भारत, निजीसीका
हां। योग और आयवदे जीसीे निवषाय परी देुनि�या मं प्रभाव �ाले सीभ्यतागत ज्ञाा� हामं निवश्व कल्याण के निलेए प्रयासी करते रहा�े
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रहाे हां। ये स्वस्थे जीीव� को बीढ़ावा देे रहाे हां। आजी कई वल्किश्वक की प्रेरणा देेता हाै।
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चा�ौनितयं के सीमाधाा� के निलेए देुनि�या भारत की ओर दे� रहाी हाै। जीय सीोम�ाथे ! n
न्यूू इंंडि�यूा समााचाार | 1-15 फरवरी 2026 11

