Page 12 - NIS Hindi 1-15 Feb, 2026
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लिवशेे�  पीीएम कॉा आ�ेख






                                                                                          ु
             हार बीार, पीढ़ी देर पीढ़ी, हामारी महाा� सीभ्यता के लेोगं �े   यहाी राष्ट्रेीय जीीव� धाारा हाै। इसीका अ�सीरण आपको गौरव
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             �दे को सीभालेा, मनिदेर को निफर सीे �ड़ाा निकया और उसीे   सीे भर देेता हाै। इसीको छेोड़ा देे�े का मतलेबी हाै, मृत्यु। इसीसीे
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             प�� जीीवंत निकया।                               अलेग हाो जीा�े पर निव�ाश हाी हाोगा।”
                                                                                                   ं
                महामदे गजी�वी ले�कर चालेा गया, लेेनिक� सीोम�ाथे के   ये सीव�निवनिदेत हाै निक आजीादेी के बीादे सीोम�ाथे मनिदेर के
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             प्रनित हामारी भाव�ा को हामसीे छेी� �हां सीका। सीोम�ाथे सीे   प�नि��मा�ण का पनिवत्र देानियत्व सीरदेार वल्लेभभाई प�ले के
                                                                                                    े
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             जीड़ाी हामारी आस्थेा, हामारा निवश्वासी और प्रबीले हाुआ। उसीकी   सीक्षम हााथें म आया। उन्हां� आग बीढ़कर इसी देानियत्व क निलेए
                                                                                     े
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             आत्मा लेा�ं श्रद्धालेुओं की भीतर सीांसी लेेती रहाी। सीाले   कदेम बीढ़ाया। 1947 मं देीवालेी के सीमय उ�की सीोम�ाथे
             1026 के हाजीार सीाले बीादे आजी 2026 मं भी सीोम�ाथे मनिदेर   यात्रा हाुई। उसी यात्रा के अ�ुभव �े उन्हां भीतर तक झीकझीोर
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             देुनि�या को सींदेेश देे रहाा हाै निक निम�ा�े की मा�निसीकता र��े   निदेया, उसीी सीमय उन्हां�े घोषाणा की निक यहां सीोम�ाथे मनिदेर
             वालेे �त्म हाो जीाते हां, जीबीनिक सीोम�ाथे मनिदेर आजी हामारे   का प�नि��मा�ण हाोगा। अंतत� 11 मई 1951 को सीोम�ाथे मं
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             निवश्वासी का मजीबीूत आधाार बी�कर �ड़ाा हाै। वो आजी भी   भव्य मनिदेर के द्वाार श्रद्धालेुओं के निलेए �ोले निदेए गए।
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             हामारी प्रेरणा का स्रोत हाै, वो आजी भी हामारी शल्किक्त का पंजी हाै।  उसी अवसीर पर तत्कालेी� राष्ट्रेपनित �ॉ. राजीद्री प्रसीादे
                                                                                                  ं
                ये हामारा सीौभाग्य हाै निक हाम�े उसी धारती पर जीीव� पाया   उपल्किस्थेत थेे। महाा� सीरदेार सीाहाबी इसी ऐनितहाानिसीक निदे� को
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             हाै, निजीसी�े देेवी अनिहाल्याबीाई हाोलेकर जीैसीी महाा� निवभनित को   देे��े के निलेए जीीनिवत �हां थेे, लेेनिक� उ�का सीप�ा राष्ट्रे के
             जीन्म निदेया। उन्हां�े ये सीुनि�ल्किश्चात कर�े का पुण्य प्रयासी निकया   सीाम�े सीाकार हाोकर भव्य रूप मं उपल्किस्थेत थेा।
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             निक श्रद्धालेु सीोम�ाथे मं पजीा कर सीकं।
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                1890 के देशक मं स्वामी निववका�दे भी सीोम�ाथे आए
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             थेे, वो अ�ुभव उन्हां भीतर तक आदेोनिलेत कर गया। 1897
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             मं चान्नाई मं निदेए गए एक व्याख्या� के देौरा� उन्हां�े अप�ी
             भाव�ा व्यक्त की। उन्हां�े कहाा, “देनिक्षण भारत के प्राचाी�
             मनिदेर और गजीरात के सीोम�ाथे जीसीे मनिदेर आपको ज्ञाा� के
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             अ�निग�त पाठ निसी�ाएगे। ये आपको निकसीी भी सींख्या मं पढ़ी
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             गई पुस्तकं सीे अनिधाक हामारी सीभ्यता की गहारी सीमझी देगे।
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                इ� मनिदेरं पर सीैकड़ां आक्रामणं के नि�शा� हां और सीैकड़ां
             बीार इ�का प�जीा�गरण हाुआ हाै। ये बीार बीार �ष्� निकए गए,
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             और हार बीार अप�े हाी ��हारं सीे निफर �ड़ाे हाुए। पहालेे की
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             तरहा सीशक्त। पहालेे की तरहा जीीवंत। यहाी राष्ट्रेीय म� हाै,


















         10  न्याू इंंनि�याा संमाचाार | 1-15 फरवरी 2026
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