Page 10 - NIS Hindi 1-15 Feb, 2026
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लिवशेे�  पीीएम कॉा आ�ेख




              सोमृनाथ स्वााभिभामृान पर्वव





               अंटूूटू आस्थाा � 1000 र्वर्ष (1026-2026)
                                              े
                                                                       व




                                                                                     े
                                                                                                   े
                                           वर्षोण 2026, संोमेंनाथे मेंंहिदीर पूर �ुए पू�ले �मेंले का 1000 वर्षोण पूूर
                                                                              े
                                                                                    े
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                                                                                                ू
                                                                                         े
                                            �ोन काा प्रताीका �ै। संहिदीयं संे बार-बार �ुए �मेंलें का बावजीदी,
                                                                                          े
                                                                                 े
                                             संोमेंनाथे मेंंहिदीर भाारता काी अ�ू� भाावना का प्रताीका का रूपू मेंं
                                            आजी भाी र्शान संे खाड़ेा �ै। संोमेंनाथे काी काथेा कावले एका मेंहिदीर
                                                                                               ं
                                                                                    े
                                                                                           े
                                            काी न�ं, बल्कि� भाारता मेंाताा का उन अननिगनता संपूूतां का अदीम्य
                                                                      े
                                                                                 ृ
                                                                              ं
                                            संा�सं काी का�ानी �ै जिजीन्होंने दीेर्श काी संस्काविता और संभ्यताा काी
                                            रक्षा काी। जीनवरी 1026 मेंं संोमेंनाथे पूर पू�लेा आक्रमेंर्ण �ुआ
                                             थेा, जिजीसंका 1 �जीार वर्षोण पूूर �ो र�े �ं ताो य� वर्षोण तात्काालेीन
                                                                     े
                                                       े
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                 �रद्रो मोदेी
                                                                                                ि
                 प्रधाानम�त्रीी             रा�ीपूविता �ॉ. राजींद्र प्रसंादी काी उपूश्विस्थाविता मेंं 1951 मेंं पूुनर्निनिर्मिमेंता
                                                                     े
                                                                                ण
                                          संोमेंनाथे मेंंहिदीर का उदी्घा�न का 75 वर्षोण पूूर्ण �ोने काा भाी संाक्षी �ै।
                                                          े
                                                                                     ं
                                            इसं जीनवरी संोमेंनाथे स्वाविभामेंान पूवण काा र्शुभाारभा �ुआ �ै। इसं
                                                                        ं
                                                                                               े
                                           विवर्षोय पूर प्रस्ताुता �ै प्रधाानमेंंत्रीी नरद्र मेंोदीी �ारा लिलेखिखाता आलेखा…
                                           सीो      म�ाथे... ये शब्दे सी�ते हाी हामारे म� और हृदेय मं गव� और आस्थेा
                                                                  ु
                                                    की भाव�ा भर जीाती हाै। भारत के पल्किश्चामी त� पर गजीरात मं, प्रभासी
                                                                                        ु
                                                    पा�� �ाम की जीगहा पर ल्किस्थेत सीोम�ाथे, भारत की आत्मा का
                                े
             सोोमनााथ शि�वशि�ंग के
                                                                                                  ं
                                          शाश्वत प्रस्तनितकरण हाै। द्वाादेश ज्योनितनिलेंग स्तोत्रम मं भारत के 12 ज्योनितनिलेगं
                                                    ु
             द�ना सोे व्यक्ति� अपनाे
                श
                                                                            ं
                                                             ं
                                          का उल्लेे� हाै। ज्योनितनिलेगं का वण�� इसी पल्किक्त सीे शुरू हाोता हाै...“सीौराष्ट्रेे
                            ु
             सोभीी पापं सोे म� होो
                                          सीोम�ाथें चा...यानि� ज्योनितनिलेगं मं सीबीसीे पहालेे सीोम�ाथे का उल्लेे� आता हाै।
                                                               ं
             जााताा हो। मना मं जाो भीी
                    ै
                                          ये इसी पनिवत्र धााम की सीभ्यतागत और आध्याल्कित्मक महात्ताा का प्रतीक हाै।
             पुण्य केामनााएंं होोताी         शास्त्रं मं ये भी कहाा गया हाै:
             हो, वो पूरीी होोताी हो औरी
              ं
                             ं
             मृत्युु के बााद आत्माा          “साोमडिलङ्गंं नरो दीृष्ट्वा साव�पंापंै� प्रमुच्याते।
                   े
                                                                      ृ
                                ै
             स्वगश केो प्रााप्त होोताी हो।   लभते फलं मनोवाल्कि�छेतं मत� स्वगुं सामाश्रायाेत्॥”
                                             अथेा�त्, सीोम�ाथे निशवनिलेंग के देश�� सीे व्यल्किक्त अप�े सीभी पापं सीे मुक्त हाो
                                                                               ू
                                          जीाता हाै। म� मं जीो भी पुण्य काम�ाएं हाोती हां, वो परी हाोती हां और मृत्यु के बीादे
                                          आत्मा स्वग� को प्राप्त हाोती हाै।
                                             देभा�ग्यवश, यहाी सीोम�ाथे, जीो करोड़ां लेोगं की श्रद्धा और प्राथे��ाओं का
                                              ु
                                            ं
                                                                                               ं
                     प्रधाानम�त्रीी कॉा आ�ेख पीढ़ने   कद्री थेा, निवदेेशी आक्रामणकारिरयं का नि�शा�ा बी�ा, निजी�का उद्दोेश्य निवध्वसी थेा।
                     कॉे लि�ए QR कॉोड स्कॉैन कॉरेंं।
                                                             ं
                                             वषा� 2026 सीोम�ाथे मनिदेर के निलेए बीहाुत महात्व र�ता हाै क्यंनिक इसी महाा�
         8  न्यूू इंंडि�यूा समााचाार | 1-15 फरवरी 2026
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